SITA BENGRA RAMGARH – जानें रामगढ़ के सीता बेंगरा का इतिहास।

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SITA BENGRA RAMGARH – जानें रामगढ़ के सीता बेंगरा का इतिहास।

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छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संपदाओं से समृद्ध प्रदेश है। इसके साथ ही, यहाँ रामायण काल से जुड़े होने के भी अनेक साक्ष्य मिलते हैं। इन्हीं में से एक है सरगुजा के रामगढ़ में स्थित सीता बेंगरा गुफा, जो इतिहास की प्राचीन कड़ियों को संजोए हुए है और रामायण काल की याद दिलाती है।

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पौराणिक मान्यता

किवदंती है कि रामायण काल में भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के दौरान यहाँ पहुँचे थे। सरगुजा की बोली में ‘भेंगरा’ का अर्थ ‘कमरा’ होता है, इसीलिए इस गुफा को सीता बेंगरा कहा जाता है, अर्थात ‘सीता का कमरा’।
गुफा के प्रवेश द्वार के पास खंभे गाड़ने के लिए पत्थरों में छेद बने हुए हैं, और एक ओर भगवान राम के चरण चिह्न अंकित हैं।

SITA BENGRA RAMGARH

मान्यता है कि ये चरण चिह्न महाकवि कालिदास के समय में भी विद्यमान थे। कालिदास के महाकाव्य मेघदूतम में रामगिरि पर्वत पर सिद्धांगनाओं (अप्सराओं) की उपस्थिति का भी उल्लेख मिलता है, जिसे कुछ विद्वान इसी क्षेत्र से जोड़ते हैं।

पुरातात्विक महत्व

पुरातत्वविदों के अनुसार, यहाँ मिले शिलालेख बताते हैं कि सीता बेंगरा गुफा ईसा पूर्व दूसरी-तीसरी शताब्दी की है। इसे देश की सबसे पुरानी नाट्यशाला माना जाता है। माना जाता है कि उस समय यहाँ क्षेत्रीय राजाओं द्वारा भजन-कीर्तन और नाटकों का आयोजन किया जाता था।
1906 में पूना से प्रकाशित वी.के. परांजपे के शोध “A Fresh Line of Meghdoot” में भी उल्लेख है कि रामगढ़ (सरगुजा) ही राम का वनवास स्थल और मेघदूतम की प्रेरणा-स्थली ‘रामगिरि’ है।

SITA BENGRA RAMGARH

लक्ष्मण रेखा और सुरंग

Sita bengra Ramgarh – गुफा के बाहर लगभग दो फीट चौड़ा एक गड्ढा है, जो सामने से पूरी गुफा को घेरता है। इसे लक्ष्मण रेखा कहा जाता है। इसके बाहर एक पाँव का निशान भी दिखाई देता है। यहाँ से जुड़ी एक और रोचक जगह है हथफोड़ सुरंग, जिसकी लंबाई लगभग 500 मीटर है।
गुफा परिसर में पहाड़ी पर भगवान राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान की 12वीं-13वीं शताब्दी की सुंदर प्रतिमाएँ भी स्थापित हैं।

चंदन मिट्टी और कालिदास की कथा

Sita bengra Ramgarh – रामगढ़ की पहाड़ियों में एक चंदन गुफा भी है। यहाँ से विशेष प्रकार की चंदन-सुगंधित मिट्टी निकलती है, जिसका उपयोग लोग धार्मिक कार्यों में करते हैं। एक मान्यता यह भी है कि महाकवि कालिदास, जब राजा भोज से नाराज़ होकर उज्जयिनी छोड़ आए, तो उन्होंने इन्हीं पहाड़ियों में शरण ली थी और यहीं बैठकर अपना प्रसिद्ध महाकाव्य मेघदूत रचा था।

स्थापत्य और संरचना

Sita bengra Ramgarh – का आकार लगभग 14 मीटर लंबा, 5 मीटर चौड़ा और 1.8 मीटर ऊँचा है। इसके सामने गोल आकार में तराशे गए पत्थर के बेंच बने हैं, जो सीढ़ीनुमा ढंग से सजाए गए हैं और दूर से देखने पर अर्धचंद्राकार (हाफ मून) की आकृति बनाते हैं। इतिहासकार मानते हैं कि इस तरह की स्थापत्य कला उस समय के उन्नत शिल्पकौशल का प्रमाण है।

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पर्यटन दृष्टि से महत्व

Sita bengra Ramgarh – अंबिकापुर से लगभग 40-50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह स्थल आज भी श्रद्धालुओं, इतिहास-प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहाँ आकर लोग न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेते हैं, बल्कि एक ऐसे पौराणिक और ऐतिहासिक माहौल का अनुभव करते हैं, जो सहस्राब्दियों पुराना है। शांत वातावरण, पहाड़ियों की हरियाली और गुफाओं की ऐतिहासिक आभा, आगंतुकों को एक अलग ही दुनिया में ले जाती है।

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