RAJIV LOCHAN MANDIR – छत्तीसगढ़ का ऐसा मंदिर जहां मान्यता है कि स्वयं भगवान प्रकट होकर भक्तों का प्रसाद करते हैं ग्रहण।
भारत भूमि अपनी धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए जानी जाती है। यहां के मंदिर न केवल पूजा-अर्चना का केंद्र होते हैं, बल्कि स्थापत्य कला और ऐतिहासिक विरासत को भी प्रदर्शित करते हैं। इन्हीं में से एक है छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के निकट स्थित राजीव लोचन मंदिर। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और अपनी भव्य मूर्तिकला, ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक आस्था के लिए विशेष पहचान रखता है।
राजिम नगरी और उसका महत्व –
राजिम नगर छत्तीसगढ़ का एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है, जिसे प्रायः “छत्तीसगढ़ का प्रयागराज” कहा जाता है। इसका कारण है यहां स्थित तीन नदियों – महानदी, पैरी और सोंढूर – का संगम। हिंदू धर्म में नदियों के संगम को अत्यंत पवित्र माना गया है। इसीलिए राजिम नगर का महत्व केवल छत्तीसगढ़ में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में है। हर वर्ष माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक यहां राजिम मेला और राजिम कुंभ का आयोजन होता है। इस दौरान हजारों साधु-संत, महात्मा, नागा साधु और श्रद्धालु यहां इकट्ठा होते हैं। संगम में स्नान, कथा-प्रवचन, भजन-कीर्तन और धार्मिक सम्मेलन इस आयोजन को विशेष बना देते हैं।
राजीव लोचन मंदिर का इतिहास –
इतिहासकारों के अनुसार, Rajiv lochan mandir का निर्माण लगभग 7वीं शताब्दी में हुआ था। इसका निर्माण नल वंश के शासकों द्वारा कराया गया माना जाता है। मंदिर का नाम भगवान विष्णु के स्वरूप “राजीव लोचन” पर रखा गया है।
“राजीव” का अर्थ होता है कमल और “लोचन” का अर्थ है नेत्र। अर्थात् वह स्वरूप जिनकी आंखें कमल के समान सुंदर और कोमल हैं। यह मंदिर प्राचीन काल से ही विष्णु भक्तों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां आकर लोग न केवल पूजा-अर्चना करते हैं, बल्कि आध्यात्मिक शांति भी प्राप्त करते हैं।

स्थापत्य कला और मूर्तिकला की विशेषताएँ –
राजीव लोचन मंदिर स्थापत्य कला का अनूठा उदाहरण है। मंदिर के द्वार पर विशाल द्वारपाल मूर्तियाँ आगंतुकों का स्वागत करती हैं। अंदर प्रवेश करते ही स्तंभों और दीवारों पर की गई अद्भुत नक्काशी मन को मोह लेती है।
- स्तंभ और शिल्पकला
मंदिर के स्तंभों पर भगवान विष्णु के विभिन्न रूपों के चित्रण किए गए हैं। इनमें दशावतार – मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि – के सुंदर शिल्प अंकित हैं।
- पौराणिक कथाओं का चित्रण
मंदिर की दीवारों पर रामायण और महाभारत की कथाएँ उकेरी गई हैं। गंधर्व, अप्सरा, यक्ष और देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ इतनी बारीकी से बनाई गई हैं कि पत्थर की कठोरता के बावजूद उनमें जीवंतता दिखाई देती है।
- गर्भगृह और देवप्रतिमा
मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित है। श्रद्धालु यहां दर्शन कर अपने जीवन को धन्य मानते हैं। गर्भगृह की शांति और भव्यता भक्तों को आध्यात्मिक आनंद का अनुभव कराती है।
धार्मिक महत्व और राजिम कुंभ –
Rajiv lochan mandir केवल स्थापत्य कला का केंद्र नहीं, बल्कि आस्था का विशाल स्तंभ भी है। यहां हर वर्ष राजिम कुंभ का आयोजन होता है, जिसे छत्तीसगढ़ का आध्यात्मिक महाकुंभ भी कहा जाता है।
राजिम कुंभ के दौरान –
देशभर से संत-महात्मा यहां प्रवचन देने आते हैं।
श्रद्धालु संगम में स्नान कर पुण्य अर्जित करते हैं।
भागवत कथा, सत्संग और भजन-कीर्तन होते हैं।
विशाल कलश यात्रा और शोभायात्रा मंदिर परिसर को जीवंत कर देती है।
यह आयोजन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लोगों को सद्भाव, एकता और भक्ति के सूत्र में जोड़ता है।
पर्यटन और यात्रा की दृष्टि से महत्व –
राजीव लोचन मंदिर धार्मिक दृष्टि से जितना महत्वपूर्ण है, पर्यटन की दृष्टि से भी उतना ही आकर्षक है। यहां आने वाले यात्री मंदिर की भव्यता के साथ-साथ संगम तट की प्राकृतिक सुंदरता का भी आनंद लेते हैं। राजिम नगर में स्थित कुलेश्वर महादेव मंदिर और आसपास के अन्य प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक यात्रा का विशेष अनुभव कराते हैं। संगम क्षेत्र का शांत वातावरण ध्यान और साधना के लिए उपयुक्त माना जाता है।
कैसे पहुंचे राजीव लोचन मंदिर?
सड़क मार्ग – रायपुर से राजिम की दूरी लगभग 45 किलोमीटर है। बस और टैक्सी सेवाएँ आसानी से उपलब्ध हैं।
रेल मार्ग – रायपुर रेलवे स्टेशन नजदीकी प्रमुख स्टेशन है।
वायु मार्ग – रायपुर का स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट नजदीकी हवाई अड्डा है।
छ.ग की ऐतिहासिक सांस्कृतिक धार्मिक धरोहर –
राजीव लोचन मंदिर छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर का अद्भुत उदाहरण है। यहां की मूर्तिकला, संगम तट की पवित्रता और राजिम कुंभ का आध्यात्मिक माहौल हर आगंतुक को आकर्षित करता है।
यह मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि कला, आस्था और आध्यात्मिकता का संगम है। छत्तीसगढ़ आने वाले हर यात्री को राजीव लोचन मंदिर की भव्यता का अनुभव अवश्य करना चाहिए।

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