KABRA PAHAD RAIGARH – छत्तीसगढ़ की अद्भुत प्राकृतिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर।

Spread the love

KABRA PAHAD RAIGARH – छत्तीसगढ़ की अद्भुत प्राकृतिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर।

Instagram Page Follow Us
WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now

छत्तीसगढ़ न केवल अपनी प्राकृतिक संपदाओं के लिए, बल्कि धार्मिक और ऐतिहासिक प्रमाणों के लिए भी प्रसिद्ध है। रामायण और महाभारत काल से जुड़े अनेक प्रसंगों तथा ऐतिहासिक पहलुओं को यह भूमि आज भी उजागर करती है। यहाँ की संस्कृति, पुरातात्विक धरोहर और लोककथाएं इसे पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनाती हैं। यही कारण है कि देश-विदेश से आने वाले वैज्ञानिक, शोधकर्ता और सैलानी यहां घूमना पसंद करते हैं। इन्हीं प्रमुख स्थलों में रायगढ़ जिले का कबरा पहाड़ भी शामिल है, जो अपनी ऐतिहासिक महत्ता और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है।

FOLLOW OUR WHATSAPP CHANNEL

छत्तीसगढ़ी भाषा से लिया गया है ‘कबरा’ शब्द –

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्थित कबरा पहाड़ अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक मान्यताओं के अनूठे संगम के लिए प्रसिद्ध है। ‘कबरा’ शब्द छत्तीसगढ़ी भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ होता है ‘धब्बेदार’। यह नाम इसकी सतह पर पाए जाने वाले विशेष धब्बेदार पैटर्न के कारण पड़ा है। बलुआ पत्थर से निर्मित यह पहाड़ घने वृक्षों और झाड़ियों से आच्छादित है और अपने भीतर प्रकृति और इतिहास का अद्भुत खजाना संजोए हुए है।

यहां स्थित है श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र –

Kabra pahad Raigarh – उत्तर-पश्चिमी छोर रायगढ़ शहर से ही आरंभ होता है, जहां स्थित हनुमान मंदिर, जिसे पहाड़ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, नगर का एक प्रमुख दर्शनीय स्थल है। वहीं इसका दक्षिण-पूर्वी छोर ओडिशा राज्य के प्रसिद्ध हीराकुंड बांध के मुहाने पर बसे घुनघुटापाली में समाप्त होता है, जहां कदमघाट में स्थित घण्टेश्वरी देवी का मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है।

KABRA PAHAD RAIGARH

भौगोलिक स्थिति और पहुँच –

Kabra pahad Raigarh जिला मुख्यालय से लगभग तेरह किलोमीटर पूर्व में, राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 217 के किनारे स्थित है। यह प्रदेश की राजधानी रायपुर से लगभग दो सौ सत्तर किलोमीटर उत्तर-पूर्व में और ओडिशा सीमा से मात्र आठ किलोमीटर पहले ग्राम पंचायत लोइंग के पश्चिम में स्थित भोजपल्ली गाँव में पाया जाता है, जिसे 1972 से पहले भेजरापाली के नाम से जाना जाता था। यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ और ओडिशा के सांस्कृतिक संगम का उदाहरण है, जहाँ छत्तीसगढ़ी और उड़िया भाषाओं का मिला-जुला प्रभाव देखा जा सकता है और संवाद का प्रमुख माध्यम ‘लरिया’ बोली है।

लोककथाएँ और धार्मिक महत्व –

कबरा पहाड़ के शैलाश्रय और उसमें बने प्राचीन चित्रों को लेकर स्थानीय लोगों के बीच कई जनश्रुतियाँ प्रचलित हैं। गाँव के बुजुर्ग चन्द्रिका प्रसाद भोई बताते हैं कि इन चित्रों को देवताहा अर्थात देवस्थान माना जाता है और हर वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ रात्रि भर पूजा, भागवत कथा और नामयज्ञ का आयोजन होता है, जिसमें लोइंग, जुर्दा, विश्वनाथपाली और कोतरापाली जैसे आस-पास के गाँवों के लोग भी शामिल होते हैं। पुरुष और महिलाएँ दोनों अनुष्ठानों में भाग लेते हैं, हालांकि परंपरा के अनुसार महिलाओं को यहाँ चढ़ाए गए प्रसाद को खाने की अनुमति नहीं होती। होली के अतिरिक्त नवरात्रि और महाशिवरात्रि पर भी यहाँ श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने आते हैं।

यहां गड़ा है पूर्वजों का खजाना –

Kabra pahad Raigarh स्थानीय मान्यताओं के अनुसार कबरा पहाड़ में पूर्वजों का खजाना गड़ा हुआ है, इतना कि उससे पूरे संसार को ढाई दिन तक भोजन कराया जा सकता है। कहा जाता है कि इस खजाने और शैलचित्रों की रक्षा मधुमक्खियों के बड़े-बड़े छत्ते करते हैं जो शैलाश्रय की ऊँचाई पर बने होते हैं। कुछ ग्रामीणों का यह भी मानना है कि कभी-कभी रात में यहाँ अचानक तेज रोशनी या चमक दिखाई देती है। गाँव में यह विश्वास भी है कि यदि किसी की कोई कीमती वस्तु या पशुधन खो जाए तो लोग ‘कबरापाट देवता’ से मन्नत करते हैं और वस्तु मिलने पर प्रसाद चढ़ाकर धन्यवाद देते हैं।

नियम और परंपराएँ –

KABRA PAHAD RAIGARH

Kabra pahad Raigarh के शैलाश्रय में प्रवेश के लिए कुछ परंपरागत नियम भी प्रचलित हैं, जिनमें नशा करके जाना, धूम्रपान करना, जूते-चप्पल पहनकर प्रवेश करना, रजस्वला स्त्री का प्रवेश करना और जन्म या मृत्यु जैसी अशुद्धि की अवस्था में वहाँ जाना सख्ती से वर्जित है। ग्रामीण मानते हैं कि इन नियमों का उल्लंघन करने वालों को मधुमक्खियाँ भगा देती हैं और उनके साथ अनिष्ट होता है।

पर्यटन, रोमांच और सावधानियाँ –

कबरा पहाड़ धार्मिक महत्व के साथ-साथ ट्रैकिंग, रॉक पेंटिंग और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी एक आकर्षक स्थल है। यहाँ का घना जंगल, ऊँचे-नीचे रास्ते और वन्यजीवों की मौजूदगी इसे एक रोमांचक अनुभव बनाती है। हालांकि, यह क्षेत्र पूरी तरह प्राकृतिक है और यहाँ कोई पर्यटन सुविधा उपलब्ध नहीं है, इसलिए यहाँ आने वालों को समूह में यात्रा करने, किसी स्थानीय गाइड को साथ लेने और पर्याप्त भोजन व पानी की व्यवस्था करके आने की सलाह दी जाती है।

यहां प्रकृति की दिखती है अद्भुत छटा –

छत्तीसगढ़ का कबरा पहाड़ एक ऐसा स्थल है जहाँ प्रकृति की अद्भुत छटा, इतिहास की गहराई और आस्था की शक्ति एक साथ अनुभव की जा सकती है। चाहे आप रोमांच के खोजी हों, अतीत के रहस्यों के प्रेमी हों या आध्यात्मिक शांति की तलाश में हों, कबरा पहाड़ आपको हर दृष्टि से एक यादगार और पूर्ण अनुभव प्रदान करता है।

Also read – हर सोमवार सुबह 11 बजे होगा कलेक्टर जनदर्शन, अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश जारी।