CHIRMIRI CHHATTISGARH – जहां आज भी नही चलती ऑटो, रिक्शा व टैक्सी, लिफ्ट लेकर लोग करते हैं आना जाना।
Chirmiri chhattisgarh – के मध्य में बसा चिरमिरी अपनी कोयला खदानों के लिए तो मशहूर है ही, लेकिन उससे भी ज्यादा खास है यहाँ की अनोखी परिवहन परंपरा। यहाँ न तो ऑटो-रिक्शा चलते हैं और न ही टैक्सियाँ। लोगों की आवाजाही का आधार है – “लिफ्ट” देने और लेने की अनूठी परंपरा।
लिफ्ट का मानवीय रिश्ता –
Chirmiri Chhattisgarh – में सफ़र केवल दूरी तय करने का साधन नहीं, बल्कि साझा अनुभव है। यहाँ चाहे अजनबी हो या परिचित, लोग अपनी गाड़ी रोककर राहगीरों को बिठा लेते हैं और बिना किसी स्वार्थ के मंज़िल तक पहुँचा देते हैं। यह परंपरा सहयोग और अपनापन की ऐसी मिसाल है, जिसे देखकर बाहरी लोग भी चकित रह जाते हैं।

पहाड़ी भूगोल और परिवहन की चुनौती –
Chirmiri Chhattisgarh – ऊँचे पहाड़ी इलाकों में फैला है। यहाँ की खड़ी चढ़ाइयाँ और संकरी सड़कें बस या ऑटो जैसी सेवाओं को टिकने नहीं देतीं। पुराने समय में शुरू हुई बस सेवा भी अब टूट-फूट के कारण बंद हो चुकी है। यही वजह है कि यहाँ के लोग एक-दूसरे पर निर्भर होकर “लिफ्ट संस्कृति” को ज़िंदा रखे हुए हैं।
दूरी और जीवनशैली का मेल –
Chirmiri Chhattisgarh – शहर के अलग-अलग हिस्से – पोड़ी से लेकर कोरिया कॉलियरी तक – 1 से 7 किलोमीटर की दूरी पर बसे हैं। ऐसे में लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी लिफ्ट पर ही आधारित है। कामकाज, पढ़ाई या बाज़ार जाने के लिए यह परंपरा उनके लिए आसान और सुविधाजनक विकल्प बन चुकी है।
इतिहास से आज तक –

Chirmiri Chhattisgarh – शुरुआत में सिर्फ़ कुछ मजदूरों के पास स्कूटर हुआ करते थे। धीरे-धीरे यह आदत बन गई कि जिसके पास वाहन है, वह राहगीर को बिठाकर छोड़ देगा। समय के साथ यह व्यवस्था इतनी मज़बूत हो गई कि अब यह चिरमिरी की पहचान बन चुकी है। पूर्व महापौर डमरू रेड्डी ने सिटी बस सेवा शुरू की थी, लेकिन आज अधिकांश बसें जर्जर हो चुकी हैं। मौजूदा महापौर रामनरेश राय भी मानते हैं कि शहर का भूगोल नियमित सार्वजनिक परिवहन को असंभव बना देता है।
इंसानियत की मिसाल –
Chirmiri Chhattisgarh – आज भी यदि कोई राहगीर सड़क किनारे खड़ा हो, तो बाइक या कार सवार बिना झिझक रुककर मदद करते हैं। यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और मानवीय सहयोग की मिसाल है। यही वजह है कि चिरमिरी को “मुफ्त लिफ्ट की नगरी” कहा जाता है।

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