AMBIKAPUR NEWS – अम्बिकापुर के शहीद भगत सिंह वार्ड में बनेगा वीर शहीद भगत सिंह के नाम पर भव्य चौक – पार्षद दीपक यादव का ऐलान।
भाजपा के युवा पार्षद दीपक यादव ने शहीद भगत सिंह वार्डवासियों के साथ वीर शहीद क्रांतिकारियों को याद करते हुए उनके छायाचित्र पर पुष्प अर्पित किए। इस दौरान शहीद भगत सिंह के नाम पर भव्य चौक बनाए जाने का भी ऐलान किया।
AMBIKAPUR NEWS – पार्षद दीपक यादव ने कहा कि –

“भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले क्रांतिकारी भगत सिंह करोड़ों युवाओं के प्रेरणास्रोत हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अंबिकापुर शहर में उनके नाम पर कोई चौक नहीं है। मेरे वार्ड का नाम ‘शहीद भगत सिंह वार्ड’ है, इसलिए मैं चाहता हूं कि यहां उनकी प्रतिमा के साथ एक भव्य चौक स्थापित किया जाए। मैं भरोसा दिलाता हूं कि जल्द ही ‘शहीद भगत सिंह चौक’ की स्थापना होगी, और इसके लिए मैं पूरी कोशिश करूंगा।”
AMBIKAPUR – क्रांतिकारियों का बलिदान और शहीद दिवस का महत्व –
Ambikapur news – भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारी और नरमपंथी दोनों का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। शहीद दिवस हर वर्ष 23 मार्च को उन वीर सपूतों की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने भारत को आज़ाद कराने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। 23 मार्च 1931 की आधी रात को ब्रिटिश सरकार ने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी पर चढ़ा दिया था। उनके बलिदान को याद रखने और नई पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए इस दिन को इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में देखा जाता है।
AMBIKAPUR NEWS – शहीद दिवस का इतिहास –
1928 में लाला लाजपत राय की मृत्यु के बाद, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव और उनके साथियों ने ब्रिटिश हुकूमत से बदला लेने की शपथ ली। उन्होंने ब्रिटिश पुलिस अधीक्षक जेम्स ए. स्कॉट को मारने की योजना बनाई थी, क्योंकि स्कॉट ने ही लाला लाजपत राय पर लाठीचार्ज का आदेश दिया था, जिससे उनकी मृत्यु हो गई थी। लेकिन गलती से स्कॉट की जगह जॉन पी. सॉन्डर्स को मार दिया गया।
Ambikapur news – इसके बाद, 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने सेंट्रल असेंबली में बम फेंककर ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। उन्होंने खुद को गिरफ्तार भी करवा दिया। बाद में सॉन्डर्स हत्याकांड के आरोप में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी की सजा सुनाई गई। उनकी फांसी की तारीख 24 मार्च तय की गई थी, लेकिन जनता के गुस्से के डर से ब्रिटिश सरकार ने एक दिन पहले 23 मार्च को ही उन्हें फांसी दे दी। आज भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव देश के युवाओं के लिए संघर्ष, साहस और बलिदान के प्रतीक हैं।